संदेश

त्रेता में था  द्वापर  में  था  नहीं पता युग बीत गए। कलयुग में भी मैं अब जाना हूं राम राज कैसा था। अहो भाग हैं धन्य भाग हैं धन्य हुए हम योगी जी। शासन में न तुम होते सब भूले राम राज कैसा था।

रामराज

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रामराज के तुम मजमे देखो उतार उतार कर चशमे देखो इंटरव्यू में अब बारह नंबर_ मिलते हैं उसको दस में देखो रामराज की बात निराली कहती रहती  है घरवाली  भक्त  विचारे ऊंघ  रहे हैं_ संघी  नाचें   दे   दे  ताली      विनय यदु महाराज

दोहा

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पद से  हों  बे- शक बड़े, दिखे कर्म से हीन। विनय न उनकी कीजिए, ऐसे लोग कमीन।।                 विनय यदु महाराज

यदुवंश

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जय श्री कृष्ण                                 चौपाई  पूजहिं अहीर मिले नहिं धोखा। जो जानहिं सो खावहिं चोखा।। जो चाहो सुख  सोवन रतियां। कहें  संत  जप  माधव  बतियां।।                          विनय यदु महाराज        जो मनुष्य अहीर (अहि=सर्प, ईर=मारने बाला अर्थ सर्प को मारने बाला, दुष्टों की दुष्टता को हरने बाला... अर्थात भगवान कृष्ण) की पूजा करता है उस मनुष्य को जीवन में कभी धोखा नहीं मिलता। ऐसा जो मनुष्य जानते हैं वो जीवनभर अच्छे पकवानों का पान करते हैं अथवा जीवन में कष्ट नहीं भोगते।       संतजन ऐसा कहते हैं कि अगर जीवन भर बिना कष्ट की रातें सोना चाहते हैं, जीवन में कोई कष्ट न आए तो माधव, कृष्ण, अच्युत, गोपाल, श्याम, मोहन.... जिनके अनंत नाम हैं उन वासुदेव  भगवान व उनकी बातों का बड़े प्रेम से जाप कर।