रोना है इस बात का, भक्त बड़े हैं ढीट।
जितनी गाली पड़ गईं, उतनी मिलीं न सीट।।
विनय यदु महाराज
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त्रेता में था द्वापर में था नहीं पता युग बीत गए। कलयुग में भी मैं अब जाना हूं राम राज कैसा था। अहो भाग हैं धन्य भाग हैं धन्य हुए हम योगी जी। शासन में न तुम होते सब भूले राम राज कैसा था।
रामराज के तुम मजमे देखो उतार उतार कर चशमे देखो इंटरव्यू में अब बारह नंबर_ मिलते हैं उसको दस में देखो रामराज की बात निराली कहती रहती है घरवाली भक्त विचारे ऊंघ रहे हैं_ संघी नाचें दे दे ताली विनय यदु महाराज
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